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Vishwa Hindi Parishad | विश्व हिंदी परिषद

+(011) 35990037 , +(91) 8586016348

विश्व हिंदी अन्वेषिका

Publishing Body: Vishwa Hindi Parishad

Publishing format: Online/E-patrika

Address: Second Floor, Flat No. 4, H No.- 281 Maidangarhi 110068 New Delhi

No: 8586016348

Email: vishwahindiparishadoffice@gmail.com

ई-पत्रिका के बारे में

“विश्व हिंदी अन्वेषिका” एक त्रैमासिक, चिंतनपरक एवं शोधमुखी ई-पत्रिका है, जो वर्ष 2026 में प्रकाशित होने जा रही है और हिंदी जगत में एक सशक्त बौद्धिक मंच के रूप में स्थापित होने का संकल्प रखती है। यह ई-पत्रिका हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कृति तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा के विविध आयामों का गहन अध्ययन, विश्लेषण और संवर्धन करते हुए समकालीन संदर्भों में भारतीय चिंतन को सार्थक दिशा प्रदान करती है। “अन्वेषिका” अपने नाम के अनुरूप सत्य, ज्ञान और मूल्यपरक विचारों की खोज का माध्यम है, जो परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करते हुए नवचिंतन को प्रोत्साहित करती है।

इस ई-पत्रिका में भाषा-विज्ञान, साहित्यिक विमर्श, काव्य और कथा-साहित्य, लोकजीवन एवं लोकसंस्कृति, भारतीय दर्शन, इतिहास, राष्ट्रचिंतन, शिक्षा, मीडिया, अनुवाद अध्ययन तथा सूचना-प्रौद्योगिकी के युग में हिंदी की भूमिका जैसे व्यापक विषयों को समाहित किया गया है। साथ ही, वैश्वीकरण के प्रभाव, सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण, भारतीय भाषाओं की चुनौतियाँ, डिजिटल युग में साहित्य की नई प्रवृत्तियाँ तथा युवा पीढ़ी में हिंदी के प्रति जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। यह ई-पत्रिका न केवल अकादमिक शोध को प्रोत्साहित करती है, बल्कि समाज और साहित्य के बीच एक सजीव संवाद स्थापित करने का भी प्रयास करती है, जिससे विचारों का आदान-प्रदान और बौद्धिक समृद्धि संभव हो सके।

“विश्व हिंदी अन्वेषिका” का यह विशेषांक महान राष्ट्रचिंतक, दार्शनिक एवं विचारक पं॰ दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित है। उनके द्वारा प्रतिपादित “एकात्म मानववाद” की अवधारणा, जिसमें व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समन्वित एवं संतुलित विकास का दृष्टिकोण निहित है, आज के परिवर्तित वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध होती है। इसके साथ ही, “अंत्योदय” का सिद्धांत—जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करता है—समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है। इस विशेषांक में उनके विचारों की व्याख्या, उनके राष्ट्रवादी दृष्टिकोण का विश्लेषण तथा वर्तमान समय में उनकी उपयोगिता को विभिन्न शोध आलेखों और विद्वत लेखों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

यह ई-पत्रिका नवोदित और स्थापित दोनों प्रकार के लेखकों, शोधार्थियों एवं विद्वानों को एक समान अवसर प्रदान करती है, जिससे विविध दृष्टिकोणों का समावेश संभव हो सके। “विश्व हिंदी अन्वेषिका” का उद्देश्य हिंदी को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम बनाना नहीं, बल्कि उसे ज्ञान, विचार और वैश्विक संवाद की सशक्त भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करना है। हमें पूर्ण विश्वास है कि यह त्रैमासिक पत्रिका न केवल हिंदी साहित्य और शोध के क्षेत्र में नवीन आयाम स्थापित करेगी, बल्कि पाठकों के लिए प्रेरणा, चिंतन और ज्ञान का एक समृद्ध स्रोत भी सिद्ध होगी।

संपादक मंडल

👑
प्रधान संपादक - डॉ. विपिन कुमार
राष्ट्रीय महासचिव, विश्व हिंदी परिषद (drbipinkumarpu@gmail.com)
✍️
संपादक - डॉ. श्रवण कुमार
राष्ट्रीय समन्वयक, विश्व हिंदी परिषद (shrawanskm@gmail.com)
अतिथि संपादक - श्री देवी प्रसाद मिश्र
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विश्व हिंदी परिषद (dpmishra396kg2@gmail.com)
👔
सह संपादक - सुश्री मुस्कान सिंह
कार्यालय प्रबंधक, विश्व हिंदी परिषद (vishwahindiparishadoffice@gmail.com)
👤
सह संपादक - श्री अश्विनी कुमार
कार्यालय प्रभारी, विश्व हिंदी परिषद (vishwahindiparishadoffice@gmail.com)
🤝
सम्पादन सहयोग - श्री यश ठाकुर
कार्यालय प्रभारी, विश्व हिंदी परिषद (vishwahindiparishadoffice@gmail.com)

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विश्व हिंदी अन्वेषिका हेतु विश्व हिंदी परिषद कार्यालय

दूसरी मंज़िल, फ़्लैट नंबर 4, मकान नंबर- 281 मैदानगढ़ी 110068 - नई दिल्ली

📞 011 49446677, 8586016348

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