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"भारतरत्न अटल: हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन” विषय पर विश्व हिंदी परिषद द्वारा 30-31 अक्टूबर, 2026 को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन विज्ञान भवन, नई दिल्ली में किया जा रहा है। प्रतिभागिता हेतु पंजीकरण जारी है ।

विश्‍व हिन्‍दी परिषद

विश्व हिन्दी परिषद का उद्देश्य — “हिन्दी को विश्व भाषा बनाना”

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं… यह हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारी आत्मा की अभिव्यक्ति है। यह वह सेतु है जो दिलों को जोड़ता है, विचारों को दिशा देता है और समूचे विश्व को एक परिवार में बाँधने की क्षमता रखता है। विश्व हिन्दी परिषद इसी विश्वास और संकल्प के साथ निरंतर अग्रसर है कि हिन्दी को वैश्विक संवाद, सांस्कृतिक समन्वय और मानवीय मूल्यों की सशक्त भाषा बनाया जाए।

परिषद का दृढ़ विश्वास है कि सभी क्षेत्रीय भाषाओं के समन्वय से ही हिन्दी सशक्त बनती है। विविधता में एकता की यह भारतीय परंपरा हिन्दी को विश्व भाषा बनने की दिशा में ऊर्जा और विस्तार प्रदान करती है। लोकमंगल और सर्वकल्याण की भावना से प्रेरित यह संस्था हिन्दी साधकों, विद्वानों, साहित्यकारों और भाषा प्रेमियों को एक सूत्र में पिरोते हुए उसके निरंतर उन्नयन और विकास के लिए समर्पित है।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक, और भारत से विश्व के विभिन्न देशों तक—हिन्दी प्रेमियों को एक मंच पर लाकर परिषद पिछले एक दशक से हिन्दी प्रचार-प्रसार की दिशा में एक सशक्त जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। यह केवल भाषा का विस्तार नहीं, बल्कि भावनाओं, विचारों और संस्कृतियों को जोड़ने का सतत प्रयास है।

परिषद का उद्देश्य ऐसी हिन्दी को स्थापित करना है जो समाज-सापेक्ष, व्यावहारिक, प्रकार्यात्मक और जीवंत हो—जो केवल पुस्तकों तक सीमित न रहकर जन-जन की भाषा बने। हिन्दी की बहुआयामी भूमिका—मातृभाषा, राजभाषा, संपर्क भाषा और अंतरराष्ट्रीय भाषा—को सशक्त करते हुए परिषद समय-समय पर विद्वानों और चिंतकों को एकत्र कर उनके कर्तव्यों और दायित्वों का बोध कराती है।

विभिन्न राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सम्मेलनों के माध्यम से हिन्दी के प्रति जागरूकता और समर्पण को नई ऊर्जा दी जाती है। हिन्दी की सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से सम्मानित कर उनके प्रयासों को गौरवान्वित किया जाता है—ताकि यह प्रेरणा और आगे बढ़े, और हिन्दी का प्रकाश निरंतर फैलता रहे।

विश्व हिन्दी परिषद का संदेश स्पष्ट है —
“हिन्दी केवल भाषा नहीं, बल्कि विश्व को जोड़ने वाली सांस्कृतिक चेतना है।”

जुड़ने हेतु अपील

आइए, हम सभी मिलकर इस महाअभियान का हिस्सा बनें।
यह केवल परिषद का संकल्प नहीं—यह हम सबका साझा स्वप्न है।

यदि आप चाहते हैं कि आपकी भाषा विश्व में गूँजे,
यदि आप चाहते हैं कि भारतीय संस्कृति का प्रकाश विश्व के हर कोने तक पहुँचे,
तो विश्व हिन्दी परिषद से जुड़कर इस अभियान को अपनी शक्ति दें।

आपका एक कदम, एक विचार, एक योगदान—
हिन्दी को विश्व भाषा बनाने की दिशा में एक नई दिशा, एक नई गति दे सकता है।

आज ही जुड़ें…
क्योंकि हिन्दी का भविष्य, हम सबके सामूहिक प्रयासों में बसता है।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

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समाचार

गतिविधियां

सम्मान

सिंगापुर से श्री ममता मंडल जी को राजभाषा सम्मान से सम्मानित किया गया।
उज़्बेकिस्तान से उल्फत मुखी बोवा जी को राजभाषा सम्मान से सम्मानित किया गया
निदरलैंड से डॉ. पुष्पिता अवस्थी जी को राजभाषा सम्मान से सम्मानित किया गया।

झलकियां

स्वर्णिम भारत अभियान

भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए स्वर्णिम भारत अभियान में आपका हार्दिक स्वागत है। 

 यदि आप एक प्रतिनिधि के रूप में अभियान का सहभागी होना चाहते हैं……

 विश्व हिंदीं परिषद द्वारा चलाए जा रहे स्वर्णिम भारत अभियान में आप प्रखंड/ जिला /राज्य /राष्ट्रीय स्तर की कार्यकरी समिति में शामिल होने के लिए आमंत्रित है। आपका हार्दिक स्वागत हैI विश्व हिंदी परिषद् का प्रकल्प

परिषद द्वारा पूर्व के कार्यक्रम में सहयोगी संस्था

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