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Vishwa Hindi Parishad | विश्व हिंदी परिषद

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24 मार्च, 2026 विश्व हिंदी परिषद के सहयोग से जीसस एंड मेरी कॉलेज में एकदिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन

राजभाषा विभाग की अहम भूमिका, हिंदी का तकनीकी विस्तार तेज़

विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश की राजभाषा नीति को नई दिशा प्राप्त हो रही है। उनके मार्गदर्शन में हिंदी को प्रशासनिक कार्यों में अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी कार्यप्रणाली में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु कई नवाचारात्मक पहलें लागू की जा रही हैं, जिनके परिणामस्वरूप हिंदी न केवल राजकाज की भाषा के रूप में सुदृढ़ हो रही है, बल्कि तकनीकी क्षेत्र में भी अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा रही है।

उन्होंने आगे कहा कि राजभाषा विभाग की सचिव श्रीमती अंशुली आर्य के प्रयासों से हिंदी और प्रौद्योगिकी के समन्वय को नई गति मिली है, जिससे हिंदी का तकनीकी विस्तार और अधिक मजबूत हुआ है।

विश्व हिंदी परिषद एवं जीसस एंड मेरी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “राजभाषा हिंदी और प्रौद्योगिकी (कार्यालयी कार्यों में नवाचार)” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में शिक्षकों एवं शिक्षणेतर कर्मियों को हिंदी के व्यावहारिक एवं तकनीकी उपयोग से संबंधित विभिन्न पहलुओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्या प्रो. सि. मॉली ने की। संकाय समन्वयक के रूप में डॉ. अमृता शास्त्री एवं डॉ. प्रीति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशिक्षक के रूप में डॉ. ध्रुव कुमार का योगदान भी अत्यंत सराहनीय रहा।

अपने विचार रखते हुए डॉ. विपिन कुमार ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और जन-जन की अभिव्यक्ति है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी युग में हिंदी की प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है और अब यह धारणा बदल रही है कि तकनीक केवल अंग्रेज़ी तक सीमित है।

उन्होंने बताया कि यूनिकोड, हिंदी टाइपिंग टूल्स, ई-ऑफिस, वॉइस टाइपिंग तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक तकनीकी साधनों ने हिंदी को डिजिटल कार्यों में सरल, सुलभ और प्रभावी बना दिया है। अब जटिल दस्तावेजों का हिंदी में अनुवाद भी आसानी से संभव हो रहा है, जिससे कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

डॉ. विपिन कुमार ने यह भी कहा कि केवल तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानसिकता में परिवर्तन भी उतना ही आवश्यक है। हिंदी में कार्य करना कोई बाध्यता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, गौरव और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है। भाषा और तकनीक का यह समन्वय एक नई “नवक्रांति” को जन्म देता है।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को हिंदी के डिजिटल उपयोग, कार्यालयी कार्यों में नवाचार तथा आधुनिक तकनीकी टूल्स के प्रभावी प्रयोग की व्यवहारिक जानकारी दी गई। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस प्रकार के आयोजनों को समय की आवश्यकता बताते हुए हिंदी को आधुनिक संदर्भों में सशक्त बनाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग और प्रसार का सामूहिक संकल्प लिया गया।

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