विश्व हिन्दी परिषद हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं शोध को नई दिशा देने के लिए शिक्षा, अनुसंधान और अकादमिक गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित करती है।
शोध कार्यक्रम देखें →विश्व हिन्दी परिषद का उद्देश्य हिन्दी भाषा को केवल संवाद का माध्यम बनाना नहीं, बल्कि उसे वैश्विक ज्ञान, अनुसंधान और अकादमिक विकास की प्रमुख भाषा के रूप में स्थापित करना है। परिषद विभिन्न शोध परियोजनाओं, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं तथा अकादमिक सहयोग के माध्यम से हिन्दी के क्षेत्र में नवीन संभावनाओं का विस्तार करती है।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और शिक्षाविदों के सहयोग से हिन्दी भाषा के शोध एवं शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना।
विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में हिन्दी अध्ययन को आधुनिक शिक्षण पद्धति एवं डिजिटल संसाधनों के माध्यम से सशक्त बनाना।
हिन्दी साहित्य, भाषाविज्ञान, अनुवाद, तकनीकी हिन्दी और वैश्विक हिन्दी पर उच्च गुणवत्ता वाले शोध को बढ़ावा देना।
हिन्दी भाषा को आधुनिक शोध, शिक्षा और वैश्विक संवाद की भाषा बनाने हेतु परिषद अनेक अकादमिक क्षेत्रों में सक्रिय है।
प्राचीन एवं आधुनिक हिन्दी साहित्य के संरक्षण, अध्ययन तथा नए शोध कार्यों को प्रोत्साहन।
विश्वभर के हिन्दी शिक्षकों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग स्थापित करना।
तकनीकी हिन्दी, AI, ई-लर्निंग एवं डिजिटल सामग्री के विकास को बढ़ावा देना।
हिन्दी विषय में उत्कृष्ट शोध करने वाले विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया जाता है।
शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण, कार्यशाला एवं संगोष्ठियों का आयोजन किया जाता है।
शोध परियोजनाएँ
विश्वविद्यालय सहयोग
शोधार्थी एवं विद्यार्थी
अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम
यदि आप हिन्दी भाषा, साहित्य, अनुसंधान या शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं, तो विश्व हिन्दी परिषद के साथ जुड़कर इस ज्ञान-यात्रा का हिस्सा बनें।
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