लोक भवन, पटना में क्षेत्रीय हिन्दी सम्मेलन एवं सम्मान समारोह आयोजित
हिन्दी, भारतीय भाषाओं एवं भारतीय सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाने पर हुआ सार्थक विमर्श
पटना। विश्व हिन्दी परिषद, नई दिल्ली द्वारा 29 अगस्त 2026 को लोक भवन, पटना में “क्षेत्रीय हिन्दी सम्मेलन एवं सम्मान समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय “डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी : व्यक्तित्व एवं कृतित्व” रहा। कार्यक्रम में बिहार के महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) श्री सैयद अता हसनैन जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। सम्मेलन में हिन्दी भाषा, भारतीय भाषाओं, साहित्य, संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ।
कार्यक्रम में बिहार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, बिहार के पुलिस महानिदेशक श्री विनय कुमार, बिहार सरकार के माननीय मंत्री श्री अशोक चौधरी तथा बिहार विधान परिषद के माननीय सदस्य श्री संजय पासवान सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथियों ने हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार, भारतीय भाषाओं के संरक्षण तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक आदरणीय श्री इंद्रेश कुमार जी रहे। उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय भाषाओं को देश की विविधता और सांस्कृतिक एकता को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए हिन्दी सहित सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार पर बल दिया। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्र, एकता एवं अखंडता से जुड़े विचारों को भी रेखांकित किया।
महामहिम राज्यपाल श्री सैयद अता हसनैन जी ने हिन्दी एवं भारतीय भाषाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भाषा को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक संवाद का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास किए जाने तथा नई पीढ़ी को भारतीय भाषाओं एवं समृद्ध भारतीय ज्ञान-परंपरा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का साहित्यिक सत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार श्री रमाकांत चंदन की पुस्तक “लाल पहाड़ी : स्त्री महाविहार” के साथ श्री शांतमनु जी, चुनाव आयुक्त, जम्मू-कश्मीर की पुस्तक “ज़िंदगी का नशा “का भी विमोचन किया गया। दोनों पुस्तकों के एक साथ विमोचन ने सम्मेलन को साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक दृष्टि से विशेष गरिमा प्रदान की। पुस्तक विमोचन के अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों ने साहित्य एवं ज्ञान के माध्यम से समाज में जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
पुस्तक विमोचन के पश्चात श्री शांतमनु जी ने अपने काव्य-पाठ के माध्यम से साहित्य, संवेदना और भारतीय सांस्कृतिक चेतना के विविध आयामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनके काव्य-पाठ ने उपस्थित साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं हिन्दी प्रेमियों को विशेष रूप से प्रभावित किया। पुस्तक विमोचन एवं काव्य-पाठ का यह सत्र सम्मेलन की प्रमुख विशेषताओं में रहा।
सम्मेलन में विश्व हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार जी सहित हिन्दी एवं साहित्य जगत से जुड़े अनेक विशिष्ट अतिथियों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों, राजभाषा से जुड़े प्रतिनिधियों एवं हिन्दी प्रेमियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर हिन्दी के प्रचार-प्रसार, भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन तथा युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान-परंपरा से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया गया।
विश्व हिन्दी परिषद द्वारा आयोजित यह क्षेत्रीय हिन्दी सम्मेलन हिन्दी को भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता एवं वैश्विक संवाद के सशक्त माध्यम के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।
सम्मेलन में विश्व हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार जी सहित शिक्षाविदों, साहित्यकारों, राजभाषा प्रतिनिधियों एवं हिन्दी प्रेमियों ने सहभागिता की।