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गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हिंदी का स्वर्णिम काल – 27.04.2026 (दैनिक भास्कर)

विश्व हिंदी परिषद एवं भारती कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “राष्ट्रभाषा हिंदी का भविष्य एवं औपचारिक हिंदी” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का उद्देश्य हिंदी भाषा के भविष्य, उसके औपचारिक स्वरूप तथा प्रशासनिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में उसकी बढ़ती भूमिका पर गंभीर विचार-विमर्श करना था।
कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय और उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने हिंदी के प्रभावी, मानकीकृत एवं व्यावहारिक प्रयोग पर अपने विचार साझा किए तथा इसके व्यापक उपयोग को लेकर सार्थक चर्चा की।
इस अवसर पर विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में हिंदी को नई दिशा प्राप्त हो रही है और प्रशासनिक तथा तकनीकी क्षेत्रों में इसका विस्तार तीव्र गति से हो रहा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि हिंदी को आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-गवर्नेंस से जोड़ना समय की आवश्यकता है, जिससे यह भाषा विकास और सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन सके।
डॉ. विपिन कुमार ने आगे कहा कि हिंदी का उज्ज्वल भविष्य उसके औपचारिक, मानकीकृत और व्यावहारिक प्रयोग पर निर्भर करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के डिजिटल और वैश्विक युग में हिंदी को केवल बोलचाल तक सीमित रखना उचित नहीं है, बल्कि इसे शासन-प्रशासन, शिक्षा, न्याय एवं तकनीक की सशक्त भाषा के रूप में विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने औपचारिक हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकारी कार्यों, न्यायिक प्रक्रियाओं और शैक्षणिक क्षेत्र में स्पष्टता एवं एकरूपता बनाए रखने के लिए मानक हिंदी का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने राजभाषा विभाग की सचिव श्रीमती अंशुली आर्य के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में हिंदी और प्रौद्योगिकी के समन्वय को नई गति मिली है, जिससे हिंदी का तकनीकी क्षेत्र में प्रभाव निरंतर सुदृढ़ हो रहा है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रो. पूरनचंद टंडन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी का भविष्य तभी सुदृढ़ होगा जब नई पीढ़ी को इसके औपचारिक और मानक स्वरूप से जोड़ा जाएगा। उन्होंने हिंदी के शुद्ध, सरल और प्रभावी प्रयोग को उसकी व्यापक स्वीकार्यता का आधार बताते हुए युवाओं को इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भारती कॉलेज की प्राचार्या प्रो. सलोनी गुप्ता ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. ज्योति मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर डॉ. स्वर्णिम दीक्षित ने भी हिंदी के प्रचार-प्रसार, उसके प्रशासनिक उपयोग तथा औपचारिक स्वरूप की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय प्रो. मंजु शर्मा द्वारा किया गया, जबकि आयोजन में सहयोग डॉ. अभिषेक पुनीत ने प्रदान किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा के महत्व, उसके व्यावहारिक उपयोग और उसके भविष्य को लेकर गहन एवं सार्थक चर्चा हुई।
विश्व हिंदी परिषद के मार्गदर्शन एवं सहयोग से संपन्न यह कार्यशाला अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायक रही। इस आयोजन ने न केवल हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता को बढ़ाया, बल्कि उसके व्यापक प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान भी सुनिश्चित किया।
अंततः आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति हार्दिक धन्यवाद एवं कृतज्ञता प्रकट की।

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