विश्व हिंदी परिषद द्वारा हिंदी के विस्तार और भारतीय संस्कृति के आत्मीय प्रसार को विश्व पटल पर स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित ‘भारत को जानो’ कार्यक्रम बुधवार को परिषद प्रांगण में उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में 18 देशों से आए प्रतिनिधियों ने हिंदी और भारतीय संस्कृति के संरक्षण व प्रचार के लिए परिषद के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने की। परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री देवी प्रसाद मिश्र ने ‘भारत और इंडिया’ के बीच के अंतर पर प्रकाश डाला। विश्व हिंदी परिषद के राजस्थान प्रभारी श्री श्रीकुमार लखोटिया ने संयोजक के रूप में कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. श्रवण कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया।
आयोजन की सफलता में केंद्र प्रमुख श्री भगवानी गोस्वामी समिति के अध्यक्ष श्री राजीव लोचन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ज्योति ने ‘वंदे मातरम्’ के अंग्रेजी पाठ से वातावरण को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी भारत की सांस्कृतिक विरासत, दर्शन और परंपराओं की अभिव्यक्ति का माध्यम है।
सभी विदेशी प्रतिनिधियों ने मंच से अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ‘भारत को जानो’ जैसे कार्यक्रम उन्हें भारत की परंपराओं, जीवन मूल्यों और मानवीय दृष्टि से गहराई से जोड़ते हैं।
उन्होंने हिंदी सीखने और अपने-अपने देशों में भारतीय संस्कृति के प्रसार का संकल्प भी व्यक्त किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. विपिन कुमार ने हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हिंदी भारत की सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान और परंपराओं की वाहक है।
अंत में सभी अतिथियों और विदेशी प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। परिषद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का सौहार्दपूर्ण समापन हुआ।