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आत्मनिर्भर भारत से तीसरी अर्थव्यवस्था तक – 22.01.2025 (दैनिक भास्कर)

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा बार-बार व्यक्त किया गया यह वक्तव्य कि “भारत शीघ्र ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा” केवल एक राजनीतिक कथन नहीं, बल्कि एक सुविचारित आर्थिक संकल्प है। यह वक्तव्य देश की विकास-यात्रा का लक्ष्य भी है और दिशा भी। बदलते वैश्विक परिदृश्य, भू-राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत का यह आत्मविश्वास सुदृढ़ नीति, स्थिर नेतृत्व और संरचनात्मक सुधारों का प्रतिफल है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह कथन किसी अनुमान पर आधारित नहीं, बल्कि ठोस आर्थिक संकेतकों, जनसांख्यिकीय लाभांश और नीतिगत सुधारों पर आधारित है। पिछले एक दशक में भारत ने जिस प्रकार बुनियादी ढाँचे, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण और सेवाओं में निरंतर प्रगति की है, उसने वैश्विक संस्थानों और निवेशकों के बीच भारत को एक विश्वसनीय आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

प्रधानमंत्री का यह स्पष्ट मत रहा है कि विकास केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम होना चाहिए। यही कारण है कि तीसरी अर्थव्यवस्था का लक्ष्य केवल आकार में वृद्धि नहीं, बल्कि गुणवत्ता, समावेशन और स्थायित्व से जुड़ा है।

तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में भारत की यात्रा की नींव वर्ष 2014 के बाद प्रारंभ हुए व्यापक आर्थिक सुधारों में निहित है। जीएसटी ने कर प्रणाली को सरल और एकीकृत किया, जिससे व्यापार सुगमता में वृद्धि हुई। दिवालियापन और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) ने वित्तीय अनुशासन स्थापित किया। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) ने कल्याणकारी योजनाओं को पारदर्शी और प्रभावी बनाया।

इन सुधारों ने न केवल अर्थव्यवस्था को औपचारिक स्वरूप दिया, बल्कि निवेश के लिए अनुकूल वातावरण भी तैयार किया—जो किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है।

प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, तीसरी अर्थव्यवस्था का लक्ष्य आत्मनिर्भरता के बिना अधूरा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान ने भारत को उपभोग से उत्पादन की ओर अग्रसर किया। उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के माध्यम से भारत ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत की।

इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, रक्षा, सौर ऊर्जा और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता ने भारत को न केवल आयात-निर्भरता से मुक्त किया, बल्कि निर्यात क्षमता भी बढ़ाई—जो तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की अनिवार्य शर्त है।

प्रधानमंत्री के इस संकल्प को साकार करने में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल की भूमिका निर्णायक रही है। उन्होंने भारत की व्यापार नीति को इस लक्ष्य के अनुरूप ढाला कि आर्थिक वृद्धि टिकाऊ और वैश्विक हो।

श्री गोयल के नेतृत्व में भारत ने ऐसे मुक्त व्यापार समझौते किए, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए निर्यात को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने बार-बार यह स्पष्ट किया कि भारत की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की राह अन्यायपूर्ण समझौतों से नहीं, बल्कि संतुलित और आत्मसम्मान आधारित व्यापार से होकर जाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य में निर्यात की केंद्रीय भूमिका स्पष्ट दिखाई देती है। तीसरी अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारत को वैश्विक बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। इसी दिशा में पीयूष गोयल ने एमएसएमई, स्टार्टअप और स्थानीय उद्योगों को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने के प्रयास किए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म, लॉजिस्टिक्स सुधार और ई-कॉमर्स के माध्यम से छोटे उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच मिल रही है। यह आर्थिक लोकतंत्रीकरण भारत की विकास कहानी को व्यापक आधार देता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया है कि तीसरी अर्थव्यवस्था का लक्ष्य तेज़, सस्ता और आधुनिक बुनियादी ढांचे के बिना संभव नहीं है। पिछले वर्षों में राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व निवेश हुआ है।

यह निवेश केवल निर्माण नहीं, बल्कि आर्थिक गति का इंजन है। लॉजिस्टिक लागत में कमी, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता और क्षेत्रीय संतुलन—ये सभी तीसरी अर्थव्यवस्था के मार्ग को प्रशस्त करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य का एक महत्वपूर्ण पक्ष भारत की युवा शक्ति है। तीसरी अर्थव्यवस्था बनने के लिए जनसंख्या को बोझ नहीं, बल्कि उत्पादक शक्ति में बदलना होगा। स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों ने मानव पूंजी को आर्थिक विकास से जोड़ा है।

युवा भारत आज नवाचार, उद्यमिता और तकनीक के माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका निभाने को तैयार है।

“भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा”—यह वक्तव्य अब केवल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व, स्पष्ट आर्थिक दृष्टि और पीयूष गोयल जैसे नीति निर्माताओं की सक्रियता इस संकल्प को साकार करने की दिशा में ठोस आधार प्रदान कर रही है।आज भारत केवल तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि विश्व आर्थिक संतुलन को आकार देने वाला राष्ट्र बन रहा है। तीसरी अर्थव्यवस्था का लक्ष्य भारत की आकांक्षा भी है और उसकी क्षमता का प्रमाण भी।

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