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ट्रांसफ़ॉर्मिंग इंडिया 2025 : प्रधानमंत्री मोदी के स्वस्थ भारत – समृद्ध भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम – 01.09.2025 (वीर अर्जुन)

भारत आज एक ऐसे परिवर्तनकाल से गुजर रहा है, जहाँ विकास केवल आर्थिक सूचकांकों या बुनियादी ढांचों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण, नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संतुलन को भी अपनी धुरी में समेट रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने “ट्रांसफ़ॉर्मिंग इंडिया” का जो सपना देखा था, वह अब ठोस परिणामों में बदलता दिखाई दे रहा है। इसी दृष्टि की प्रत्यक्ष झलक राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम, प्रगति मैदान में आयोजित “ट्रांसफ़ॉर्मिंग इंडिया 2025” कार्यक्रम और एक्सपो में देखने को मिली।

तीन दिनों तक चले इस भव्य आयोजन में न केवल विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी योजनाओं का प्रदर्शन हुआ, बल्कि भारत की परंपरा और आधुनिकता का ऐसा अनूठा संगम प्रस्तुत किया गया जिसने यह साबित किया कि स्वस्थ भारत ही समृद्ध भारत की आधारशिला है।

भारत की पहचान हमेशा से अपनी सांस्कृतिक विरासत और जीवनशैली पर आधारित रही है। आयुर्वेद, योग, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी जैसी परंपरागत चिकित्सा पद्धतियाँ हमारी धरोहर हैं। लेकिन वैश्विक मंच पर इन्हें वैज्ञानिक आधार और आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की माँग है।

“ट्रांसफ़ॉर्मिंग इंडिया 2025” एक्सपो ने ऐसी संतुलन को प्रदर्शित किया। यहाँ पंचकर्म केंद्रों से लेकर डिजिटल हेल्थ ऐप तक, हर्बल औषधियों से लेकर टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म तक – सबको एक छत के नीचे प्रस्तुत किया गया। इससे यह संदेश गया कि भारत केवल अपनी जड़ों से जुड़ा नहीं रहना चाहता, बल्कि उन्हें आधुनिकता की रोशनी में नयी ऊँचाइयों तक ले जाना चाहता है।

इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा “ट्रांसफ़ॉर्मिंग इंडिया पवेलियन”। यहाँ स्वास्थ्य मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, MSME, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, डिजिटल इंडिया मिशन और स्टार्टअप इंडिया जैसी अनेक योजनाओं का समेकित प्रदर्शन किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण हमेशा से यह रहा है कि विकास खंडित नहीं, बल्कि समेकित होना चाहिए। जब स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्यमिता और डिजिटलीकरण मिलकर कार्य करेंगे तभी भारत वास्तविक रूप से आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकेगा।

इस पवेलियन ने न केवल उपलब्धियों को सामने रखा, बल्कि यह भी दिखाया कि अलग-अलग मंत्रालयों की पहले कैसे एक-दूसरे से जुड़कर संपूर्ण परिवर्तन की दिशा में काम कर रही हैं।

आयोजन में देश के अनेक प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे। त्रिपुरा के माननीय राज्यपाल इंद्रसेना रेड्डी अल्लू, अंतरराष्ट्रीय योग गुरु डॉ. एच. आर. नागेन्द्र, पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण और इंटीग्रेटेड आयुष काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. शिष्टा नड्डा जैसे वक्ताओं ने आयोजन को नई ऊँचाई दी।

डॉ. नड्डा का यह कहना कि “आयुष और एलोपैथी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है” एक ऐतिहासिक विचार है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अब स्वास्थ्य सेवाओं में “या-तो-या” की जगह “दोनों का संतुलन” चाहता है।

इस एक्सपो में केवल चर्चा ही नहीं, बल्कि नवाचार को प्रोत्साहन भी दिया गया। कृषि, स्वास्थ्य, महिला एवं शिशु कल्याण, आयुष उद्यमिता और स्टार्टअप क्षेत्र में काम कर रहे अनेक संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

इससे यह संदेश गया कि “स्वस्थ भारत” का निर्माण केवल डॉक्टरों और अस्पतालों पर निर्भर नहीं है, बल्कि किसान, महिला उद्यमी, नवप्रवर्तन कर्ता और समाज का हर वर्ग इसमें बराबरी का योगदान दे सकता है।

आज पूरी दुनिया वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों की ओर आकर्षित हो रही है। अमेरिका और यूरोप में योग और आयुर्वेद का बढ़ता प्रभाव इसका प्रमाण है। “ट्रांसफ़ॉर्मिंग इंडिया 2025” ने भारत को एक बार फिर यह अवसर दिया कि वह स्वयं को वैश्विक स्वास्थ्य गुरु के रूप में प्रस्तुत करे।

भारत अगर अपनी परंपरागत प्रणालियों को आधुनिक विज्ञान और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के साथ जोड़ दे तो यह केवल घरेलू स्वास्थ्य मॉडल नहीं रहेगा, बल्कि पूरे विश्व के लिए स्थायी समाधान बन सकता है।

हालाँकि इस आयोजन की सफलता निर्विवाद है, परंतु असली चुनौती इन विचारों और योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने की है। गांवों तक डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचना, औषधीय पौधों की खेती को किसानों की आय का साधन बनाना, आयुष शिक्षा को विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में बढ़ावा देना – ये कार्य तभी संभव हैं जब नीति और क्रियान्वयन में निरंतरता बनी रहे।

साथ ही, यह भी ज़रूरी है कि आयुष और एलोपैथी के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि सहयोग की भावना विकसित हो। यदि दोनों प्रणालियाँ मिलकर कार्य करें तो भारत निश्चित रूप से एक ऐसा स्वास्थ्य मॉडल प्रस्तुत कर सकता है जो संतुलित, सस्ता और सर्वसुलभ हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा “स्वस्थ भारत – समृद्ध भारत” के नारे को विकास की धुरी बताया है। “आयुष्मान भारत” योजना से लेकर “डिजिटल हेल्थ मिशन” तक, और “स्टार्टअप इंडिया” से लेकर “फिट इंडिया मूवमेंट” तक – इन सभी पहल का लक्ष्य एक ही है: नागरिकों को सशक्त बनाना।

“ट्रांसफ़ॉर्मिंग इंडिया 2025” इसी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी या सम्मेलन नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की उस व्यापक दृष्टि का प्रतीक है जिसमें भारत अपनी परंपरा और आधुनिकता दोनों को साथ लेकर भविष्य की ओर अग्रसर है।

भारत का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा जब हर नागरिक स्वस्थ होगा। स्वस्थ नागरिक ही उत्पादक होंगे, और उत्पादक नागरिक ही राष्ट्र को समृद्ध बनाएँगे। “ट्रांसफ़ॉर्मिंग इंडिया 2025” ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब स्वास्थ्य केवल चिकित्सालयों या मंत्रालयों का विषय नहीं, बल्कि समग्र राष्ट्रीय विकास का आधार है।

यह आयोजन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में “स्वस्थ भारत – समृद्ध भारत” की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। अब ज़िम्मेदारी हम सबकी है कि इस विज़न को केवल प्रदर्शनी तक सीमित न रखकर इसे प्रत्येक गाँव, कस्बे और शहर तक पहुँचाएँ।