केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा भारत के व्यापार तंत्र के सशक्तिकरण के लिए कई पहलों को शुरू किया गया है। इस दिशा में ‘एक जिला एक उत्पाद’ को मज़बूती से लेकर वैश्विक व्यापार के लिए रणनीतिक कदमों तक के प्रयास उल्लेखनीय हैं।
उनकी अगुवाई में आज हमारा मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र तेजी से वृद्धि कर रहा है, और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के आंकड़े नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उद्योगों के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए गए हैं। विशेष आर्थिक क्षेत्र सुधारों के तहत फैक्ट्री स्थापित करने के लिए आवश्यक भूमि की सीमा को 50 हेक्टेयर से घटाकर 10 हेक्टेयर कर दिया गया है। साथ ही, कंपनियों को अब आवश्यक सीमा शुल्क (ड्यूटी) का भुगतान कर देश के भीतर उत्पादों की आपूर्ति करने की अनुमति दी गई है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर है कि फिनिश्ड, वेट ब्लू और ईआई टैंड चमड़े के निर्यात पर लगे बंदरगाह प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। अब इन उत्पादों को देश के किसी भी बंदरगाह या इनलैंड कंटेनर डिपो से निर्यात किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, इन उत्पादों के लिए अनिवार्य टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की शर्त भी समाप्त कर दी गई है।
आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में कुल 81.04 अरब डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14% अधिक है। विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एफडीआई 18% बढ़कर 19.04 अरब डॉलर तक पहुंचा, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता को दर्शाता है।
‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ योजना, जो 2020 में शुरू हुई, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में गेम-चेंजर साबित हो रही है। इस योजना के तहत 14 विभिन्न क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि हुई है, निर्यात और उत्पादन बढ़ा है, और लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
पिछले एक दशक में भारत का कारोबारी परिदृश्य पूरी तरह से बदल चुका है। त्वरित अप्रूवल, आसान कंप्लायंस और डिजिटली इंटीग्रेटेड सिस्टम्स के कारण आज भारत उद्योग और निवेश के लिए दुनिया की पसंदीदा जगह बनकर उभरा है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और एनडीए सरकार के सतत प्रयासों का ही परिणाम है, जिससे लो-कॉस्ट, प्रभावशाली और व्यावहारिक सुधारों के माध्यम से इनोवेशन को प्रोत्साहित और व्यवसायों को सशक्त किया।
किसी व्यवसाय को शुरू करने, चलाने या बंद करने की प्रक्रिया जो पहले जटिल और काफी समय लेने वाली मानी जाती थी, अब कहीं अधिक तेज और पारदर्शी हो गई है। व्यावसायिक कानूनों का गैर-अपराधीकरण, कंप्लायंसेस में कमी, डिजिटल अप्रूवल और तेज एग्जिट मैकेनिज्म, इन सभी रिफॉर्म्स ने सरकार और व्यवसायों के बीच की प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, जिससे भारत में एक अधिक कारगर, समावेशी और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक व्यावसायिक वातावरण बन सका है।
मोदी सरकार के सुधारों का सबसे महत्वपूर्ण आधार नियम-कानूनों का सरलीकरण रहा है। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में अब तक 42,000 से अधिक अनुपालनों को तर्कसंगत बनाया गया है। इससे कागजी कार्रवाई कम हुई, पुराने नियम समाप्त हुए और रोजमर्रा के व्यावसायिक कार्य सरल हुए हैं। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए इन बदलावों से देरी और अनुपालन लागत दोनों में कमी आई है।
सरकार ने 3,700 से अधिक कानूनी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाया है, जिनके तहत पहले छोटी-मोटी गलतियों पर भी दंड दिया जाता था। इससे विश्वास पर आधारित एक विधिक माहौल तैयार हुआ है। जन विश्वास अधिनियम, 2023 के माध्यम से 42 विभिन्न कानूनों के 183 प्रावधानों में संशोधन किया गया, जिससे छोटे-छोटे अनुपालनों में चूक होने पर आपराधिक दंड समाप्त हो गए। इन सुधारों से भारत के व्यावसायिक कानून सरल हुए, व्यापारियों पर बोझ कम हुआ और एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हुआ, जो भ्रष्टाचार और पक्षपात से मुक्त होकर विश्वास और स्पष्ट नियम-कानूनों पर आधारित है।
स्वीकृतियों को सरल और प्रभावी बनाने तथा प्रशासनिक देरी को कम करने के लिए डिजिटल मंचों का एकीकरण मोदी सरकार के सुधारों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वर्ष 2021 में राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली की शुरुआत इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम थी। यह एक एकीकृत डिजिटल मंच है, जो केंद्र और राज्य स्तर की स्वीकृतियों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है। इससे एक ही काम के लिए अलग-अलग आवेदन देने की आवश्यकता समाप्त हो गई, और सरकार-से-व्यवसाय पारिस्थितिकी तंत्र अधिक सरल और प्रभावी बना। अब तक 150 से अधिक देशों के उपयोगकर्ताओं ने एनएसडब्ल्यूएस पोर्टल के माध्यम से 75,000 से अधिक व्यावसायिक स्वीकृतियां प्राप्त की हैं।
इसके साथ ही, किसी व्यवसाय को बंद करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कॉरपोरेट निकास प्रक्रिया त्वरण केंद्र का गठन किया गया, जिससे किसी कंपनी को बंद करने में लगने वाला समय लगभग दो वर्ष से घटकर मात्र 90 दिन हो गया है। इससे सरकार और सरकारी व्यवस्थाओं पर व्यवसायियों का विश्वास बढ़ा है और धन का बेहतर पुनर्निर्धारण संभव हुआ है।
भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा प्रारंभिक उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र बन चुका है, और इसका श्रेय उन सुधारों को जाता है, जो प्रारंभिक बाधाओं को हटाकर इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करते हैं। इंटरनेट आधारित कंपनी पंजीकरण प्रपत्रों का डिजिटलीकरण, सरल पैन-टैन पंजीकरण, अनुपालनों का स्व-प्रमाणन, SPICe+ जैसी प्रक्रियाओं का सरलीकरण और बौद्धिक संपदा फाइलिंग को त्वरित करने जैसे सुधारों ने इस पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत किया है। इन सरल लेकिन प्रभावी सुधारों ने प्रवेश लागत को कम किया, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया और इनमें लगने वाले समय को घटाया।
वर्ष 2016 में जहां केवल 500 प्रारंभिक उद्यम थे, आज 1.61 लाख से अधिक मान्यता-प्राप्त प्रारंभिक उद्यम हैं। इनमें से 50% से अधिक द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में हैं, और 73,000 से अधिक में कम-से-कम एक महिला निदेशक है। हाल के वर्षों में इनमें से 100 से अधिक प्रारंभिक उद्यम 1 अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाले उद्यम (यूनिकॉर्न) बन गए हैं। इन प्रक्रिया सुधारों ने भारत के हर कोने में नवाचार और उद्यमिता की आकांक्षा को और बल दिया है।
26 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने वाला एमएसएमई क्षेत्र, जो भारत के कुल निर्यात में 45% से अधिक योगदान देता है, सुधारों का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। उद्यम पोर्टल ने 3 करोड़ से अधिक एमएसएमई को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा है, जिससे उन्हें संस्थागत ऋण, सरकारी योजनाओं और खरीद-बिक्री के मंचों तक पहुंच मिली है।
इसी दिशा में सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए जीईएम मंच एक मजबूत कदम रहा है। वित्त वर्ष 2025 में (फरवरी तक) जीईएम पोर्टल ने 5.4 लाख करोड़ रुपये का सकल व्यापारिक मूल्य दर्ज किया, जिसमें 38% हिस्सा सूक्ष्म और लघु उद्यमों से आया। स्वायत्त योजना के तहत 1.8 लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों को जीईएम पोर्टल पर पंजीकृत किया गया, जो इन सुधारों द्वारा समावेशिता की भावना को दर्शाता है।
इन कदमों ने एमएसएमई क्षेत्र की भागीदारी को और व्यापक बनाया है और व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक सुगम और सहभागी बनाया है।
पिछले 11 वर्षों की प्रगति दर्शाती है कि प्रक्रिया सुधारों ने पारदर्शी और जवाबदेह आर्थिक शासन को संभव बनाया है। अनुपालनों को सरल करना, सेवाओं को डिजिटल बनाना और प्रक्रियागत देरी को कम करना—ये सभी कदम भारत को एक सुदृढ़ और समावेशी अर्थव्यवस्था की ओर ले जा रहे हैं। ये सुधार निश्चित रूप से विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने की नींव बनेंगे—एक ऐसा भारत जहां उद्यमों को मजबूती मिले, सभी के लिए समान अवसर हों और सतत विकास व्यापक हो।